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संघ की राजभाषा नीति
राजभाषा के प्रयोग प्रसार के संबंध में भारत के संविधान में अलग-अलग उपबंध है:-
अनुच्छेद
343(1)
में यह व्यवस्था है कि संघ की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी। संघ के प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय
रूप होगा।
अनुच्छेद 343(2) में यह व्यवस्था है कि संविधान लागू होने के समय से 15 वर्ष की अवधि अर्थात 1965 तक उन शासकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी का प्रयोग किया जाता रहेगा जिनके लिए संविधान लागू होने से पहले किया जा रहा था।
परन्तु राष्ट्रपति इस अवधि में भी अर्थात 1965 से पहले भी आदेश निकाल कर किसी काम के लिए अंग्रेजी के अलावा हिन्दी का प्रयोग प्राधिकृत कर सकेंगे। (राष्ट्रपति के आदेश 1952, 1955 एवं 1960 में जारी किये)
अनुच्छेद 344 (1) में यह व्यवस्था है कि संविधान के प्रारंभ से 5 वर्ष की समाप्ति पर और तत्पश्चात् ऐसे प्रारंभ से 10 वर्ष की समाप्ति पर राष्ट्रपति द्वारा एक आयोग की नियुक्ति की जाएगी जो अन्य बातों के साथ-साथ संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए हिन्दी भाषा के अधिकाधिक प्रयोग तथा सभी या किन्हीं शासकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने के बारे में सिफारिश करेगा। (आयोग की स्थापना 1955 में हुई और रिपोर्ट 1956 में प्राप्त हुई। इस पर 1956 में संसदीय समिति गठित की गई)।
अनुच्छेद 344 (4) में यह व्यवस्था है कि एक संसदीय समिति का गठन किया जाएगा जिसमें लोकसभा के 20 और राज्यसभा के 10 सदस्य होंगे। यह समिति संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए हिन्दी के प्रयोग की प्रगति की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को देगी। ( 1956 में संसदीय समिति गठित हुई और अब तक चल रही है ) ।
अनुच्छेद 345 में यह व्यवस्था है कि राज्य का विधान मंडल राज्य में प्रयोग होने वाली भाषाओं में से किसी एक या अधिक भाषाओं को या हिन्दी को अपने सभी या किन्हीं शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग की जाने वाली भाषा के रूप में अंगीकार कर सकेगा।
अनुच्छेद 348 (1) में यह व्यवस्था है कि जब तक संसद विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे तब तक उच्चतम न्यायालय और प्रत्येक उच्च न्यायालय में की गई कार्यवाही अंग्रेजी भाषा में होगी किन्तु इस अनुच्छेद के खंड (2) में यह व्यवस्था है कि राज्य का राज्यपाल राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से अपने राज्य में स्थित उच्च न्यायालय में हिन्दी भाषा का प्रयोग प्राधिकृत कर सकता है।
अनुच्छेद 351 में यह व्यवस्था है कि संघ का कर्तव्य होगा कि वह हिन्दी भाषा का प्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे, उसकी समृद्धि सुनिश्चित करें। गृह मंत्रालय इसके लिए प्रति वर्ष वार्षिक कार्यक्रम तैयार करता है जिसमें विभिन्न मदों में हिन्दी प्रयोग के लक्ष्य निर्धारित किए जाते हैं।
1968 में संसद द्वारा एक संकल्प पारित किया गया जिसके अनुसार हिन्दी के उत्तरोतर प्रयोग हेतु एक अधिक गहन और व्यापक कार्यक्रम तैयार किया जाता है और प्रगति की विस्तृत वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट संसद के पटल पर रखी जाती है।
अनुच्छेद 120 (1) के अनुसार संसद में कार्य हिन्दी में या अंग्रेजी में किया जाएगा परन्तु यथास्थिति राज्यसभा का सभापति या लोकसभा का अध्यक्ष किसी सदस्य को जो हिन्दी या अंग्रेजी में अपनी पर्याप्त अभिव्यक्ति नहीं कर सकता, अपनी मातृभाषा में बोलने की अनुमति दे सकेगा। 120 (7) में राज्य के विधान मंडल में कार्य राज्य की राजभाषा या भाषाओं में या हिन्दी में या अंग्रेजी में किया जायेगा।
राष्ट्रपति का आदेश 1952
राष्ट्रपति ने अपने 27 मई, 1952 के आदेश द्वारा राज्यों के राज्यपालों, उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति के अधिपत्रों में अंग्रेजी भाषा के अतिरिक्त हिंदी भाषा का प्रयोग प्राधिकृत किया है।
राष्ट्रपति का आदेश 1956
राष्ट्रपति ने यह आदेश किया कि संघ के निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी के अतिरिक्त हिन्दी का प्रयोग किया जाएगा:
1. जनता के साथ पत्र व्यवहार।
2. प्रशासनिक रिपोर्ट, राजकीय पत्रिकाएं और संसद को दी जाने वाली रिपोर्ट।
3. सरकारी संकल्प गैर विधायी अधिनियम ।
4. जिन राज्य सरकारों ने अपनी राजभाषा के रूप में हिन्दी को अपना लिया है उन से पत्र-व्यवहार।
5. संविदा एवं करार।
6. अन्य देशों की सरकारों और उनके दूतों तथा अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से पत्र व्यवहार।
7. राजनयिक और काउंसलिंग पदाधिकारियों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में भारतीय प्रतिनिधियों के नाम जारी किए जाने वाले औपचारिक दस्तावेज।
राष्ट्रपति का आदेश 1960
27 अप्रैल, 1960 को राष्ट्रपति ने संसदीय समिति की रिपोर्ट पर विचार करके निम्नलिखित महत्वपूर्ण आदेश दिए-
1. विज्ञान और तकनीकी शब्दावली के विकास के लिए एक स्थायी आयोग की स्थापना।
2. अनुवाद में एकरूपता लाने के लिए एक अधिकरण की स्थापना।
3. विधि शब्दावली तैयार करने के लिए एक स्थायी आयोग की स्थापना।
4. हिंदी, हिंदी टाइपिंग और हिंदी आशुलिपि के प्रशिक्षण की व्यवस्था।
5. हिंदी के प्रचार के लिए गैर सरकारी संस्थाओं के लिए वित्तीय और अन्य प्रकार की सहायता।
6. हिंदी भाषी क्षेत्रों के केंद्रीय सरकारी विभागों के स्थानीय कार्यालय अपने आंतरिक कामकाज में हिंदी का प्रयोग करें।
7. शिक्षा संबंधी कुछ या सभी आयोजनों के लिए माध्यम के रूप में हिंदी का प्रयोग शुरू करने के लिए उचित कदम उठाए जाएं।
8. अखिल भारतीय सेवाओं और उच्चतर केंद्रीय सेवाओं में वैकल्पिक माध्यम के रूप में हिंदी का प्रयोग।
9. वैज्ञानिक, औद्योगिक और सांख्यिकीय प्रयोजनों में अंतर्राष्ट्रीय अंकों का प्रयोग।
10. हिंदी के उत्तरोत्तर प्रयोग के लिए योजना।
अनुच्छेद 351 के अनुसार संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाएं, उसका विकास करें, उसकी समृद्धि सुनिश्चित करें। गृह मंत्रालय प्रतिवर्ष इसके लिए वार्षिक कार्यक्रम तैयार करता है जिसमें विभिन्न मदों में हिंदी प्रयोग के लक्ष्य निर्धारित किए जाते हैं।
1968 में संसद द्वारा एक संकल्प पारित किया गया है जिसके अनुसार हिंदी के उत्तरोतर प्रयोग हेतु एक आर्थिक गहन और व्यापक कार्यक्रम तैयार किया गया और प्रगति की विस्तृत वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट संसद के पटल पर रखी गई।
राजभाषा आयोग और संसदीय समिति की सिफ़ारिशों पर अमल करने की दृष्टि से 1963 में राजभाषा अधिनियम बनाया गया जिसमें 1967 में संशोधन किया गया। संशोधित राजभाषा अधिनियम के मुख्य उपबंध इस प्रकार हैं-
राजभाषा अधिनियम की धारा 3 (3) के अनुसार उन सभी प्रयोजनों के लिए, जिनके लिए 26 जनवरी, 1965 से पूर्व अंग्रेजी इस्तेमाल की जा रही थी, 26 जनवरी, 1965 के बाद भी हिंदी के अतिरिक्त अंग्रेजी का प्रयोग जारी रखा जाएगा।
केंद्रीय सरकार और हिंदी को राजभाषा के रूप में न अपनाने वाले राज्यों के साथ पत्र व्यवहार अंग्रेजी में होगा, बशर्ते कि उस राज्य ने इसके लिए हिंदी के प्रयोग को स्वीकार न किया हो। इसी प्रकार हिंदी भाषी सरकारें भी उपर्युक्त राज्य सरकार के साथ अंग्रेजी में पत्र व्यवहार करेगी और यदि वे ऐसे राज्यों को पत्र हिंदी में भेजे तो उसके साथ अंग्रेजी अनुवाद भी भेजा जाएगा।
केंद्रीय सरकारी कार्यालयों आदि के बीच पत्र व्यवहार के लिए हिंदी अथवा अंग्रेजी का प्रयोग किया जा सकता है लेकिन जब तक संबंधित कार्यालयों के कर्मचारी हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त नहीं करते तब तक पत्र का दूसरी भाषा में अनुवाद उपलब्ध कराया जाता रहेगा।
राजभाषा अधिनियम की धारा 3(3) के अनुसार निम्नलिखित के लिए हिंदी और अंग्रेजी दोनों का ही प्रयोग अनिवार्य हैः-
1. संकल्प
2. सामान्य आदेश
3. नियम
4. अधिसूचनाएं
5. प्रशासनिक और अन्य रिपोर्ट या प्रेस विज्ञप्तियां
6. संसद के किसी सदन या सदनों के समक्ष रखी गई अन्य रिपोर्ट और अन्य
सरकारी कागज-पत्र
7. करार
8. लाइसेंस
9. परमिट
10. निविदा सूचना और इनके प्रारूप तथा आरक्षण चार्ट।
अधिनियम की धारा 3(4) के अनुसार इस अधिनियम के अधिनियम बनाते समय- समय यह सुनिश्चित करना होगा कि हिंदी या अंग्रेजी दोनों भाषाओं में से किसी एक भाषा में प्रवीण कर्मचारी प्रभावी रूप से अपना काम कर सकें और केवल इस आधार पर कि वे दोनों भाषाओं में प्रवीण नहीं हैं, उनका अहित न हो।
संशोधित अधिनियम में यह भी व्यवस्था है कि अंग्रेजी का प्रयोग जारी रखने के बारे में यह व्यवस्था तब तक चलती रहेगी जब तक कि इसे समाप्त करने के लिए हिंदी के राजभाषा के रूप में न मानने वाले राज्यों के विधान मंडल संकल्प पास न करें और उसके बाद ऐसा कार्य करने के लिए संसद संकल्प पास न करें।
राजभाषा नियम की धारा 4 में 26 जनवरी 1976 के बाद संसदीय राजभाषा समिति के गठन का प्रावधान है। इस समिति के 20 सदस्य लोकसभा के और 10 सदस्य राज्यसभा के होंगे। यह समिति संघ के प्रयोजनों के लिए हिंदी प्रयोग की प्रगति की जांच करेगी और रिपोर्ट राष्ट्रपति जी को प्रस्तुत करेगी।
राजभाषा संशोधन अधिनियम के फलस्वरूप सरकारी कर्मचारी अपने कामकाज में हिंदी या अंग्रेजी में से किसी भी भाषा का प्रयोग करने में स्वतंत्र है और हिंदी या अंग्रेजी भाषा में तैयार किए गए नोट या ड्राफ़्ट का दूसरी भाषा में अनुवाद उसे स्वयं नहीं देना पड़ता किन्तु कुछ प्रयोजनों के लिए हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं का प्रयोग अनिवार्य है। इस तरह सरकारी कामकाज में द्विभाषिक स्थिति काफी अर्से तक चलेगी। इस द्विभाषिक नीति के लिए यह जरूरी है कि हिंदी न जानने वाले केन्द्रीय सरकारी कर्मचारी हिंदी सीखें ताकि वे हिंदी में लिखे हुए नोट और मसौदे पढ़ और समझ सके।
केंद्रीय सरकार ने 20 जून, 1976 को राजभाषा (संघ के प्रशासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग) नियम , 1976 अधिसूचित तथा 1987 में संशोधित किए हैं। इन नियमों की महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं इस प्रकार हैं-
नियम 3(1) केन्द्रीय सरकार के कार्यालयों से पत्र आदि हिंदी भाषी राज्यों के जिन्हें ‘‘क‘‘ क्षेत्र के राज्य कहा गया है या ऐसे राज्यों में किसी अन्य कार्यालय या अन्य व्यक्ति को हिंदी में भेजे जाएंगे। यदि किसी खास मामले में कोई पत्र इन्हें अंग्रेजी में भेजा जाता है, तो उसका हिंदी अनुवाद भी साथ में भेजा जायेगा।
नियम 3(2)(क) केन्द्रीय सरकार के कार्यालयों से पत्रादि पंजाब, गुजरात और महाराष्ट्र के राज्यों तथा चंडीगढ़ क्षेत्रों के प्रशासनों को जिन्हें ‘‘ख‘‘ क्षेत्र में शामिल किया है सामान्यतः हिंदी में भेजे जाएंगे। यदि उन्हें कोई पत्र अंग्रेजी में भेजा जाता है तो उसका हिंदी अनुवाद भी साथ में भेजा जाएगा।
नियम 3(2)(ख) लेकिन इन राज्यों में किसी व्यक्ति को भेजे जाने वाले पत्रादि हिंदी या अंग्रेजी, दोनों में से किसी भाषा में भेजे जा सकते हैं।
नियम 3(3) अन्य अहिंदी भाषी राज्यों जिन्हें ‘‘ग‘‘ क्षेत्र कहा गया है किसी कार्यालय या व्यक्ति को पत्रादि अंग्रेजी में भेजे जाएंगे।
नियम 3(4) इन ‘‘ग‘‘ राज्यों में स्थित केन्द्रीय सरकार के कार्यालयों से ‘‘क‘‘ अथवा ‘‘ख‘‘ क्षेत्र की सरकारों, उनके कार्यालयों आदि को पत्रादि हिंदी अथवा अंग्रेजी में भेजे जा सकते हैं।
नियम 4(क) केन्द्रीय सरकार के एक मंत्रालय या विभाग और दूसरे मंत्रालय या विभाग के बीच पत्र व्यवहार हिंदी या अंग्रेजी में हो सकता है।
नियम 4(ख) केन्द्रीय सरकार के मंत्रालय/विभाग और ‘‘क‘‘ क्षेत्र में स्थित संबद्ध और अधीनस्थ कार्यालयों के बीच पत्र व्यवहार हिंदी में ऐसे अनुपात में होगा, जिसे सरकार निर्धारित करेगी।
नियम 4(ग) ‘‘क‘‘ क्षेत्र में स्थित अन्य केन्द्रीय सरकार के कार्यालयों के बीच पत्र व्यवहार हिंदी में होगा।
नियम 5 हिंदी में प्राप्त पत्रादि के उत्तर- केन्द्रीय सरकार के कार्यालयों से हिंदी में प्राप्त पत्रादि के उत्तर हिंदी में ही दिए जाएंगे।
नियम 6 राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 3(3) में निर्दिष्ट सभी दस्तावेजों के लिए हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही भाषाएं प्रयोग में लाई जाएगी और सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकारी की होगी।
नियम 7(2) हिंदी या हिंदी में हस्ताक्षर किए आवेदन या अभ्यावेदन का उत्तर हिंदी में दिया जाएगा।
नियम 7(3) यदि कोई कर्मचारी सेवा संबंधी विषयों से संबंधित कोई आदेश या सूचना यथास्थिति हिंदी या अंग्रेजी में चाहता हो तो उसे उसी भाषा में दी जायेगी। केन्द्रीय सरकार का कोई कर्मचारी फाइलों में हिंदी या अंग्रेजी में टिप्पणी या प्रारूप लिख सकता है और उससे यह अपेक्षा नहीं की जाएगी कि वह उसका अनुवाद दूसरी भाषा में प्रस्तुत करें।
नियम 8(2) विशिष्ट दस्तावेज, विधिक या तकनीकी प्रकृति का है अथवा नहीं, इसका विनिश्चय विभाग या कार्यालय का प्रधान करेगा।
नियम 8(4) अधिसूचित कार्यालयों में से कुछ को पूरी तरह या उनके कार्य की कुछ मदों को विनिर्दिष्ट (स्पेसीफाइड) किया जा सकता है ताकि उनमें काम करने वाले हिंदी में प्रवीण कर्मचारियों को नोटिंग, ड्राफ्टिंग आदि में केवल हिंदी का इस्तेमाल करने के लिए कहा जा सके।
नियम 10(4) जिन कार्यालयों में 80 प्रतिशत या उससे अधिक कर्मचारियों को हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त हो उन कार्यालयों को अधिसूचित किया जा सकता है।
नियम 11(1) केन्द्रीय सरकार के कार्यालयों में संबंधित सभी नियमावली, संहिताएं और अन्य प्रक्रिया संबंधी साहित्य हिंदी और अंग्रेजी, दोनों में द्विभाषिक (डिग्लॉट) रूप में तैयार किए जाएंगे।
नियम 11(2) (3) सभी फार्मों और रजिस्टरों के शीर्ष, नामपट्ट, सूचनापट्ट, स्टेशनरी आदि तथा अन्य मदें यथा रबड़ की मोहरें, धातु सीलें, पत्र शीर्ष (लैटर हैड), विजिटिंग कार्ड हिंदी और अंग्रेजी द्विभाषी होंगे।
नियम 12 प्रत्येक कार्यालय के प्रशासनिक प्रधान का यह उत्तरदायित्व होगा कि वह यह सुनिश्चित करें कि राजभाषा अधिनियम और इन नियमों का समुचित रूप से अनुपालन किया जाता है।
परिभाषाएँ
1. हिंदी में प्रवीणता..................................यदि किसी कर्मचारी ने..................................................
नियम (क) मैट्रिक परीक्षा या उसके समतुल्य या उससे उच्चतर कोई परीक्षा हिंदी माध्यम से उत्तीर्ण की है या
(ख) स्नातक परीक्षा में अथवा स्नातक परीक्षा के समतुल्य या उससे उच्चतर अन्य किसी परीक्षा में हिंदी को एक वैकल्पिक विषय के रूप में लिया था या
(ग) यदि वह इन नियमों के उपाबद्ध प्रारूप में यह घोषणा करता है कि उसे हिंदी में प्रवीणता प्राप्त है तो उसके बारे में यह समझा जाएगा कि उसने हिंदी में प्रवीणता प्राप्त कर ली है।
नियम 10(1) हिंदी में कार्यसाधक ज्ञान.............................यदि किसी कर्मचारी ने........................
(क) मैट्रिक या उसके समतुल्य या उससे उच्चतर कोई परीक्षा हिंदी विषय के साथ उत्तीर्ण की है या केन्द्रीय सरकार की हिंदी प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत आयोजित प्राज्ञ परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है या
(ख) यदि वह इन नियमों के उपाबद्ध प्रारूप में यह घोषणा करता है कि उसने ऐसा ज्ञान प्राप्त कर लिया है तो यह समझा जाएगा कि उसने हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त कर लिया है।
3. राजभाषा नियमों के अनुपालन की दृष्टि से राज्यों का विभाजन
क क्षेत्र-बिहार, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराचंल, झारखंड, छत्तीसगढ़ तथा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह।
ख क्षेत्र- गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, राज्य एवं चंडीगढ़ संघ शासित क्षेत्र।
ग क्षेत्र- शेष सभी राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश।
राजभाषा संबंधी कुछ प्रश्न और उनके उत्तर
प्र.1 राजभाषा नीति को लागू करने की दृष्टि से भारत को कितने क्षेत्रों में बांटा गया है ? प्रत्येक क्षेत्र में स्थित राज्यों के नाम लिखें।
उ. राजभाषा नियमों के अनुपालन की दृष्टि से भारतीय भू-भाग को 3 क्षेत्रों में बांटा गया है:
(क) क क्षेत्र- बिहार, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराचंल, झारखंड, छत्तीसगढ़, दिल्ली तथा अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह।
(ख) ख क्षेत्र- गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब तथा संघ शासित प्रदेश चंडीगढ़, दादर व नगर हवेली
(ग) ग क्षेत्र- शेष सभी राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश।
प्र.2 हिंदी व अहिंदीभाषी राज्यों में सूचना पट्ट/नामपट्ट आदि के लिए भाषाओं को किस क्रम से लिखा जाता है ?
उ. हिंदी भाषी राज्यों में सूचना पट्ट/नामपट्ट आदि के लिए भाषाओं का क्रम है:
हिंदी पहले और अंग्रेजी बाद में।
अहिंदीभाषी राज्यों में पहले स्थानीय भाषा, फिर हिंदी और उसके बाद अंग्रेजी।
प्र.3. सरकारी कामकाज में हिंदी का प्रयोग निर्धारित लक्ष्यानुसार सुनिश्चित करने के लिए चैक प्वाइंट कहां-कहां स्थापित किए गए हैं ?
उ. सरकारी कामकाज में हिंदी का प्रयोग निर्धारित लक्ष्यानुसार सुनिश्चित करने के लिए रोनियो, प्राप्ति एवं प्रेषण अनुभाग, तारघर, फैक्स केन्द्र, भण्डार तथा लेखा विभागों में चैक प्वॉइंट स्थापित किए गए हैं।
प्र.4. हिंदी शिक्षण योजना के अंतर्गत कर्मचारियों के लिए कौन-कौन सी परीक्षा निर्धारित है और उनका शैक्षिक स्तर क्या है ?
उ. केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों को हिंदी शिक्षण योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण देने के लिए निम्नलिखित तीन पाठ्यक्रम है :
प्रबोध - यह प्रारंभिक पाठ्यक्रम है और इसका स्तर प्राइमरी स्कूल की हिंदी के स्तर के बराबर है
प्रवीण - इसका स्तर मिडिल स्कूल की हिंदी के स्तर के बराबर है।
प्राज्ञ - इसका स्तर हाई स्कूल की हिंदी स्तर के बराबर है।
प्र.5. निर्धारित हिंदी परीक्षा पास करने पर किसी कर्मचारी को क्या-क्या प्रोत्साहन मिलते हैं ?
उ. जिन कर्मचारियों ने हिंदी की परीक्षा पास नहीं की है और वे हिंदी परीक्षा पास करते हैं तो उन्हें हिंदी परीक्षा पास करने पर 12 महीने की अवधि के लिए एक वेतनवृद्धि के बराबर राशि का वैयक्तिक वेतन दिया जाता है और उच्च अंकों के साथ परीक्षा पास करने पर नकद पुरस्कार भी दिया जाता है।
प्र.6 क्या हिंदी भाषी कर्मचारियों को भी प्रबोध, प्रवीण तथा प्राज्ञ परीक्षा पास करने पर कोई प्रोत्साहन देय है ?
उ. नहीं।
प्र.7 राजभाषा कार्यान्वयन समितियों का गठन किस-किस स्तर पर किया गया है ? इन समितियों की बैठक कितने समय बाद होती है।
उ. राजभाषा कार्यान्वयन समितियों का गठन मंत्रालय, मुख्यालय, मंडल कार्यालय, कारखानों तथा स्टेशन स्तर पर किया गया है। इन समितियों की बैठक प्रत्येक तिमाही में एक बार होती है तथा वर्ष में चार बैठकें आयोजित की जानी अपेक्षित है।
प्र.8 राजभाषा कार्यान्वयन समितियां गठित करने का क्या उद्देश्य है ?
उ. राजभाषा कार्यान्वयन समितियां गठित करने का उद्देश्य राजभाषा के प्रयोग-प्रसार की समीक्षा करना तथा कमियों को दूर करने के उपाय करना है।
प्र.9 हिंदी सप्ताह क्यों मनाया जाता है ?
उ. सरकारी कामकाज में राजभाषा के रूप में हिंदी के प्रति जागरूकता तथा इसके उत्तरोतर प्रयोग में गति लाने तथा हिंदी भाषा के प्रति अभिरुचि उत्पन्न करने के उद्देश्य से हिंदी सप्ताह मनाया जाता है जिसमें राजभाषा प्रदर्शनी, विचार गोष्ठी, काव्य गोष्ठी तथा अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
प्र.10. कर्मचारियों को सरकारी कामकाज में हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग करने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से कौन-कौन सी पुरस्कार योजना लागू की गई है ?
उ. रेलवे पर निम्नलिखित पुरस्कार व प्रोत्साहन योजनाएं लागू हैं-
1. हिंदी, हिंदी टंकण तथा हिंदी आशुलिपि परीक्षाएं पास करने पर नकद पुरस्कार तथा वेतनवृद्धि लाभ।
2. हिंदी में डिक्टेशन देने के लिए अधिकारियों को पुरस्कार।
3. रेल मंत्री निबंध प्रतियोगिता।
4. क्षेत्रीय/मंडल स्तर पर निबंध एवं वाक् प्रतियोगिताएं।
5. क्षेत्रीय/मंडल स्तर पर टिप्पण एवं प्रारूप लेखन प्रतियोगिताएं।
6. मूल हिंदी टिप्पण आलेखन पुरस्कार।
7. सामूहिक पुरस्कार योजना।
8. तकनीकी रेल विषयों पर हिंदी में मौलिक पुस्तकें लिखने पर पुरस्कार।
9. प्रेमचंद पुरस्कार योजना - उपन्यास कथा साहित्य लेखन के लिए।
10. मैथिलीशरण गुप्त पुरस्कार योजना - काव्य लेखन हेतु।
11. हिन्दी में अधिकाधिक कार्य करने के लिए रेलमंत्री/महाप्रबंधक/मंडल रेल प्रबंधक स्तर पर पुरस्कार।
प्र.11. राजभाषा अधिनियम की धारा 3(3) के अंतर्गत आने वाले विभिन्न प्रकार के कागजातों के नाम लिखे। यह भी उल्लेख करें कि नियमानुसार उक्त कागजात को अनिवार्यतः किस भाषा में जारी किया जाना चाहिए।
उ. राजभाषा अधिनियम की धारा 3(3) के अंतर्गत आने वाले विभिन्न प्रकार के कागजात निम्नलिखित हैं-
1. संकल्प 2. सामान्य आदेश 3. नियम 4. अधिसूचनाएं 5. प्रशासनिक और अन्य रिपोर्ट या प्रेस विज्ञप्तियां 6. संसद के किसी सदन या सदनों के समक्ष रखी गई प्रशासनिक तथा अन्य रिपोर्ट और अन्य सरकारी कागज-पत्र 7. करार 8. परमिट
9. निविदा सूचना और उनके प्रारूप 10. संविदाएं 11. अनुज्ञप्ति या अनुज्ञा पत्र
12. आरक्षण चार्ट।
नियमानुसार उक्त कागजात अनिवार्यतः हिंदी एवं अंग्रेजी द्विभाषी में जारी किए जाने चाहिए। इन कागजातों को द्विभाषी में जारी करने की जिम्मेदारी हस्ताक्षरकर्ता अधिकारी की होगी।
प्र.12 हिंदी में कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त कर्मचारियों से क्या अभिप्राय है ?
उ. हिंदी का कार्यसाधक ज्ञान
(क) मैट्रिक परीक्षा या उसके समतुल्य या उससे उच्चतर कोई परीक्षा हिंदी विषय के साथ उत्तीर्ण की है या केन्द्रीय सरकार की हिंदी प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत आयोजित प्राज्ञ परीक्षा या यदि उसे सरकार द्वारा किसी विशिष्ट प्रवर्ग के पदों के संबंध में इस योजना के अंतर्गत कोई निम्नतर परीक्षा विनिर्दिष्ट है, यह परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है या केन्द्रीय सरकार द्वारा उस निमित्त विनिर्दिष्ट कोई अन्य परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है या?
(ख) स्नातक परीक्षा में अथवा स्नातक परीक्षा के समतुल्य या उससे उच्चतर अन्य किसी परीक्षा में हिंदी को एक वैकल्पिक विषय के रूप में लिया था या
(ग) यदि वह इन नियमों के उपाबद्ध प्रारूप में यह घोषणा करता है कि उसे हिंदी में प्रवीणता प्राप्त है तो उसके बारे में यह समझा जाएगा कि उसने हिंदी में प्रवीणता प्राप्त कर ली है।
प्र.14 संविधान की अष्टम अनुसूची में उल्लिखित भाषाओं के नाम लिखें।
उ. संविधान की अष्टम अनुसूची के अनुच्छेद 344(1) और 351 के अंतर्गत उल्लिखित भारतीय भाषाएं:-
1. असमिया 2. तमिल 3. संस्कृत 4. उड़िया 5. तेलुगु 6. सिंधी
7. उर्दू 8. पंजाबी 9. हिंदी 10. कन्नड़ 11. बांग्ला 12. कोंकणी
13. कश्मीरी 14. मराठी 15. नेपाली 16. गुजराती 17. मलयालम 18. मणिपुरी
19. बोडो 20. संथाली 21. डोगरी 22. मैथिली
प्र.15 हिंदी दिवस कब मनाया जाता है और क्यों ?
उ. हिंदी दिवस प्रतिवर्ष 14 सितंबर को मनाया जाता है क्योंकि 1949 में इसी दिन को राजभाषा का दर्जा दिया गया था। इस अवसर पर हिंदी का कामकाज बढ़ाने के लिए हिंदी सप्ताह/पखवाड़े का आयोजन किया जाता है। हिंदी में अच्छा काम करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहन भी किया जाता है।
प्र.16 राजभाषा से क्या अभिप्राय है ?
उ. संघ द्वारा सरकारी कामकाज के लिए अंगीकार की गई भाषा को राजभाषा माना गया है। भारत सरकार ने राजभाषा के रूप में हिंदी को स्वीकार किया है जिसकी लिपि देवनागरी होगी तथा संघ के सरकारी प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप होगा।
प्र.17 केन्द्रीय हिंदी समिति का अध्यक्ष कौन होता है ?
उ. केन्द्रीय हिंदी समिति के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं।
प्र.18 राजभाषा नियमों के अनुसार किन-किन पत्रों/आवेदनों का उत्तर हिंदी में देना अनिवार्य है ?
उ. राजभाषा नियमों के अनुसार हिंदी में प्राप्त व हस्ताक्षरित पत्रों/आवेदनों का उत्तर हिंदी में देना अनिवार्य है।
प्र.19 यदि अधिकारी हिंदी में डिक्टेशन देते हैं तो उन्हें प्रोत्साहन स्वरूप कितनी राशि देय है ?
उ. अधिकारियों द्वारा हिंदी में डिक्टेशन दिए जाने पर उन्हें प्रोत्साहन स्वरूप 1000/- रुपये की एक मुश्त राशि दी जाती है। अहिंदी भाषी तथा हिंदी भाषी अधिकारियों को वर्ष के दौरान क्रमशः 10,000 तथा 20,000 शब्दों की डिक्टेशन हिंदी में देने पर यह पुरस्कार देय है।
प्र.20 राजभाषा नियमों के अन्तर्गत किस प्रकार के कार्यालय को अधिसूचित किया जा सकता है ?
उ. यदि किसी कार्यालय में कार्य करने वाले कर्मचारियों में से 80 प्रतिशत ने हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त कर लिया है तो उस कार्यालय को अधिसूचित किया जाता है।
प्र.21 राजभाषा नियमों के अनुसार क, ख तथा ग क्षेत्र में स्थित केन्द्रीय सरकार के कार्यालयों में कुल टाइपराइटरों की तुलना में हिन्दी टाइपराइटरों का निर्धारित अनुपात क्या है ?
उ. राजभाषा नियमों के अनुसार केन्द्रीय सरकार के कार्यालयों में कुल टाइपराइटरों की तुलना में हिन्दी टाइपराइटरों का क्षेत्रवार निर्धारित अनुपात इस प्रकार है-
क, क्षेत्र.............................................100 प्रतिशत
ख, क्षेत्र.............................................100 प्रतिशत
ग, क्षेत्र..............................................55 प्रतिशत
प्र.22 राष्ट्रभाषा और राजभाषा में क्या अंतर है ?
उ. राजभाषा वह भाषा है जिसे संघ अथवा कोई राज्य अथवा सरकार विधि द्वारा अपने सरकारी कामकाज में प्रयोग के लिए स्वीकार कर ले। यह किसी राज्य में एक से अधिक भी हो सकती है। संविधान की अष्टम अनुसूची में शामिल सभी 22 भारतीय भाषाएं राष्ट्रभाषाएँ कहलाती हैं। ये भाषाएं विभिन्न प्रयोजनों के लिए उपयोग की जाती है।
प्र.23 भारतीय संविधान के अनुसार राजभाषा हिन्दी कब से लागू है ?
उ. भारतीय संविधान के अनुसार राजभाषा हिन्दी 14 सितम्बर, 1949 से लागू है।
प्र.24 अष्टम अनुसूची में किन-किन भाषाओं को बाद में जोड़ा गया है ?
उ. 1. बोडो 2. संथाली 3. मैथिली और 4.डोगरी